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उत्‍तरकाशी टनल हादसा: भाई, मां से मत बताना कि मैं सुरंग में फंसा हुआ हूं!

विक्रम सिंह उत्‍तराखंड रोडवेज में सहायक के रूप में काम करता है। जैसे ही उसने उत्‍तरकाशी टनल हादसे के बारे में सुना, वह कामकाज छोड़कर यहां दौड़ा चला आया। उसने अपने बुजुर्ग माता-पिता को इस बारे में कुछ नहीं बताया पर कुछ पड़ोसियों की वजह से उन्‍हें सब पता चल गया। गत रविवार को मलबा ढहने की वजह से सिल्‍क्‍यारा सुरंग में 40 मजदूर फंसे हुए हैं।

उत्तरकाशीः उत्‍तराखंड के सिल्‍क्‍यारा सुरंग में 40 मजदूरों को फंसे आज सातवां दिन हो गया है। अमेरिकी ड्रिलिंग मशीन की मदद से राहत और बचाव कार्य चल रहा है। 150 घंटे से ज्‍यादा समय से सुरंग में फंसे मजदूरों की अब तबीयत खराब होने लगी है। सुरंग के बाहर मौजूद उनके परिजन चिंता में हैं। कुछ मजदूरों की उनके घरवालों से बातचीत भी कराई गई। ऐसे ही एक मजदूर पुष्‍कर को जब अपने भाई विक्रम सिंह से मुखातिब होने का मौका मिला तो उसके मुंह से सबसे पहले यही बात निकली- ‘भाई, मां को मत बताना कि मैं यहां सुरंग में फंसा हुआ हूं।’ कमजोरी की वजह से 25 साल के पुष्‍कर की ठीक से आवाज भी नहीं निकल रही थी। फुसफुसाते हुए उसने भाई से कहा- ‘मैं ठीक हूं। यहां और भी मजदूर फंसे हुए हैं। अगर तुम मां से मेरे बारे में बताओगे तो वह चिंता करेंगी।’ अपनी छोड़ मां की चिंता करने वाले भाई से बात कर विक्रम रो पड़ा।

सुरंग में डाली गई एक पाइप के जरिये विक्रम सिंह ने पुष्‍कर से बातचीत की। चंपावत जिले के छन्‍नी गोठ गांव के रहने वाले विक्रम ने बताया- ‘मुझे गत शुक्रवार को अपने भाई से थोड़ी देर बात करने का मौका मिला। पूरी बातचीत के दौरान उसकी चिंता यही रही कि मैं इस बारे में मां को ना बताऊं। मैंने उससे उसके स्‍वास्‍थ्‍य के बारे में पूछा और उसे रेस्‍क्‍यू ऑपरेशन को लेकर अपडेट दिया। घर में सबसे छोटा होने के कारण वह मां को सबसे ज्‍यादा प्‍यार करता है।’
मुझे इस घटना के बारे में जैसे ही पता चला, मैं बुजुर्ग माता-पिता को दुर्घटना के बारे में कुछ बताए बगैर तुरंत उत्तरकाशी चला आया। लेकिन मेरे कुछ पड़ोसियों ने घर आकर माता-पिता को इस हादसे के बारे में बता दिया। खबर सुनकर दोनों बहुत सदमे में हैं।
सुरंग के अंदर फंसे मजदूर का भाई विक्रम सिंह

पड़ोसियों ने सब बता दिया, मां बहुत परेशान चल रहीं: विक्रम सिंह

उत्तराखंड रोडवेज में सहायक के रूप में काम करने वाले विक्रम ने कहा- ‘मुझे इस घटना के बारे में जैसे ही पता चला, मैं बुजुर्ग माता-पिता को दुर्घटना के बारे में कुछ बताए बगैर तुरंत उत्तरकाशी चला आया। लेकिन मेरे कुछ पड़ोसियों ने घर आकर माता-पिता को इस हादसे के बारे में बता दिया। खबर सुनकर दोनों बहुत सदमे में हैं। मैंने अपने भाई पुष्‍कर को नहीं बताया कि हमारी मां कितनी परेशान चल रही हैं।’

सभी मजदूरों का एक ही सवाल- हमें कब बाहर निकालोगे?

आपको बता दें कि बचाव अभियान में लगे कर्मचारी लगातार सुरंग में फंसे मजदूरों से बातचीत कर उनका मनोबल बढ़ा रहे हैं। सुरंग के भीतर 11 पाइपों के जरिये ऑक्‍सीजन, सूखे मेवे समेत जरूरी सामान भेजे जा रहे हैं। टनल की वेल्डिंग में जुटे मोहम्‍मद रिजवान बताते हैं – ‘हम लगातार काम में जुटे हुए हैं। हम अंदर फंसे मजदूरों से उनके स्‍वास्‍थ्‍य के बारे में लगातार अपडेट ले रहे हैं। हर कोई बस एक ही सवाल हमसे पूछता है कि हमें कब बाहर निकालोगे?’


Suraj Tandekar

Chief Editor

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