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उपनयन संस्कार बालकों में ऊर्जा व तेज करता है प्रदान

Upnayan Sanskar: यज्ञोपवित में तीन सूत्र होते हैं। ये तीन सूत्र तीन देवता के प्रतीक हैं यानी ब्रह्मा, विष्णु और महेश। यह संस्कार करने से शिशु को बल, ऊर्जा और तेज की प्राप्ति होती है।

उपनयन संस्कार में शामिल बटुक

एमपी नगर दशहरा मैदान में सर्वधर्मार्थ कल्याण सेवा समिति के तत्वावधान में उपनयन संस्कार किया गया। मुख्य आचार्य के पंडित देवशरण दुबे ने कहा कि इस संस्कार से बालकों को शौर्य व ऊर्जा की प्राप्ति होती है। उपनयन संस्कार कार्यक्रम कोरबा जिला के शाखा प्रभारी पंडित डा. नागेन्द्र नारायण शर्मा एवं संस्थान के सदस्य पंडित योगेश पांडे, पंडित रामू तिवारी, पंडित गजेश तिवारी, पंडित अंकित पांडे, पंडित देवनारायण पांडे, पंडित प्रांजल पांडे, पंडित पुष्प राज दुबे, पंडित हर्ष नारायण शर्मा की देखरेख में कराया गया।

हिंदू धर्मों के 16 संस्कारों में से 11वां संस्कार है उपनयन संस्कार। इसे यज्ञोपवित या जनेऊ संस्कार भी कहा जाता है। उपनयन संस्कार के विषय मे मुख्य आचार्य सर्वधर्मार्थ कल्याण सेवा समिति के संस्थापक पंडित देवशरण दुबे ने कहा की वैदिक धर्म में उपनयन 11वां संस्कार है। इस संस्कार में बटुकों को दीक्षा दी जाती है और यज्ञोपवित धारण कराया जाता है। यज्ञोपवीत का अर्थ है यज्ञ के समीप या गुरु के समीप आना। यज्ञोपवीत एक तरह से बालक को यज्ञ करने का अधिकार देता है। शिक्षा ग्रहण करने के पहले यानी, गुरु के आश्रम में भेजने से पहले बालक का यज्ञोपवीत किया जाता था। भगवान रामचंद्र व कृष्ण जी का भी गुरुकुल भेजने से पहले यज्ञोपवीत संस्कार हुआ था।


Suraj Tandekar

Chief Editor

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