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कम्यूनिटी सर्विस करके सजा से छूट सकते हैं चोर, लेकिन… बीएनएस के मजेदार नियमों को जान लीजिए

भारतीय न्याय संहिता (BNS) 2023 में सुधारात्मक न्याय के तहत कुछ अपराधों के लिए सजा के रूप में कम्युनिटी सर्विस का प्रावधान किया गया है। चोरी, सरकारी कर्मी को उसके दायित्वों से रोकने के लिए आत्महत्या का प्रयास, नशे में धुत व्यक्ति द्वारा कदाचार और मानहानि जैसे अपराधों के लिए सामुदायिक सेवा दी जा सकती है।

नई दिल्ली: हम विदेशों में किसी अपराध के दंड में सामाजिक सेवा करने की बातें तो सुनते रहे हैं, लेकिन अब ऐसा भारत में भी देखने को मिलेगा। भारतीय दंड संहिता (IPC) की जगह लेने जा रहे नए कानून भारतीय न्याय संहिता (BNS) में खास तरह के अपराधों के लिए कम्यूनिटी सर्विस का दंड दिए जाने की व्यवस्था की गई है। चोरी के अपराध के लिए भी कुछ शर्तों के साथ सामुदायिक सेवा का प्रावधान किया गया है।

इन तीन शर्तों पर चोरों को बड़ी राहत

बीएनएस में चोर साबित हुए अपराधी के लिए कठोर दंड की जगह कम्यूनिटी सर्विस की सजा पाने की तीन शर्तें रखी गई हैं। पहला ये कि उसे पहली बार चोरी का दोषी ठहराया गया हो। दूसरा, चोरी की गई संपत्ति का मूल्य 5,000 रुपये से कम हो। तीसरा, वह चोरी की संपत्ति वापस करेगा या फिर उसकी कीमत का भुगतान करेगा।

इन अपराधों में भी कम्यूनिटी सर्विस की सजा

चोरी के अलावा कई अन्य अपराधों के लिए भी सामुदायिक सेवा की सजा दी जा सकती है। इनमें धारा 84 के तहत समन पर अदालत में गैर-मौजूदगी, अवैध व्यापार में सरकारी कर्मी की संलिप्तता, सरकारी कर्मी को उसकी वैध शक्ति के प्रयोग से रोकने के लिए आत्महत्या का प्रयास, नशे में धुत होकर सार्वजनिक तौर पर हो-हंगामा और मानहानि शामिल जैसे अपराध भी शामिल हैं।

.ताकि मुख्य धारा से दूर न हो जाए अपराधी

सामुदायिक सेवा के पीछे की अवधारणा अपराधियों को समाज की मुख्यधारा से दूर धकेलना नहीं बल्कि उसे सजा देने के बजाय उसे अपने गुनाह का अहसास करवाना है। बीएनएस में स्पष्ट कर दिया गया है कि इसका मकसद समुदाय का हित है जिसके लिए दोषी को कोई पारिश्रमिक नहीं मिलेगा। हालांकि, मानहानि के लिए सामुदायिक सेवा मानहानि के छोटे मामलों तक सीमित है जहां वैकल्पिक सजा दो साल तक की कैद या जुर्माना या दोनों है। मानहानिकारक सामग्री को छापने या बेचने के दोषी लोग सामुदायिक सेवा के पात्र नहीं होंगे, भले ही इन अपराधों की सजा मानहानि के समान हो।

नशे में धुत व्यक्ति अगर हंगामा बरपाए तो उसे 24 घंटे तक की साधारण कैद या 1,000 रुपये तक के जुर्माने के विकल्प के रूप में सामुदायिक सेवा की सजा दी जा सकती है। इसी तरह, अवैध व्यापार में लिप्त लोक सेवक या लोक सेवक को मजबूर करने के लिए आत्महत्या का प्रयास करने वाले व्यक्ति के लिए अदालत द्वारा एक साल तक की कैद या जुर्माना या दोनों के विकल्प के रूप में सामुदायिक सेवा का आदेश दिया जा सकता है।


Suraj Tandekar

Chief Editor

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