Korba

कोरवा आदिवासियों के 23 गांव होंगे रोशन

शासन के मंशा के अनुरूप उनके रहवास स्थल में ही जीवन स्तर में परिवर्तन लाने की कवायद की दिशा में घर को रोशन करने की योजना भी शामिल है।

कोरबा। पहाड़ों में रहने वाले विशेष पिछड़ी जनजाति कोरवा, बिरहोर व पंडो के घर रोशनी से जगमग होंगे। 23 बसाहटों के 219 घरों को क्रेडा के माध्यम से विद्युतीकरण होगी। प्रत्येक घरों में 50 हजार की लागत से 300 वाट का सौर पैनल लगाया जाएगा। दुर्गम स्थल होने की वजह से यहां बिजली की सुविधा नहीं पहुंच सकी है। न जाने कितने वर्षों से इस समुदाय के लोग अंधेरे में रह रहें हैं। अब जाकर केंद्र सरकार की पहल से इनकी सुध प्रशासन ने ली है।

बीहड़ पहाड़ी क्षेत्र में रहने वाले कोरवा, पंडो व बिरहोर जैसे विशेष पिछड़ी जनजाति के लोग आज भी अंधेरे में जीवन बसर कर रहे हैं। ऐसे परिवारों को अब केंद्र सरकार ने जनमन के तहत रोशन करने का निर्णय लिया है। वर्षों पहले जिला प्रशासन ने इन विशेष पिछड़ी जनजातियों को मैदानी क्षेत्र में लाने का प्रयास किया था, लेकिन अनुकूल वातावरण नहीं होने की वजह अब भी कई परिवार वापस चले गए हैं। इस वजह से शासन ने उनके रहवास स्थल में ही सुविधाएं देने का निर्णय लिया है। कम बसाहट के कारण पारंपरिक ऊर्जा के तहत खंभे लगाना संभव नहीं। इस वजह से आदिवासियो के घरों 300 वाट क्षमता का सौर पैनल लगाया जाएगा। प्रत्येक पैनल में 50 हजार रूपये खर्च आएगी।

पांच साल तक संधारण की जिम्मेदारी क्रेडा की होगी। तकनीकी खराबी आने पर सुधार किया जाएगा। इन पांच वर्षों के अंतराल में आदिवासी समाज के ही लोगांे को संधारण के लिए प्रशिक्षित किया जाएगा। आवास रोशन होने से आदिवासी परिवारों के जीवन स्तर में सुधार आएगा। आदिवासियों के जीवन स्तर को सुधारने के विभागीय समन्वय से सुविधा से वंचित आदिवासी समुदाय के लोगों का आधार, राशनकार्ड, बैंक खाता, मतदाता कार्ड आदि बनाने के की कवायद तेजी से की जा रही है।शासन के मंशा के अनुरूप उनके रहवास स्थल में ही जीवन स्तर में परिवर्तन लाने की कवायद की दिशा में घर को रोशन करने की योजना भी शामिल है।

पेयजल आपूर्ति के लिए पहले हो चुकी स्वीकृति

जलजीवन मिशन के तहत इन बसाहटों क्रेडा और पीएचई विभाग के संयुक्त तत्वावधान में पेयजल आपूर्ति के लिए टंकी निर्माण पहले से ही प्रस्तावित की जा चुकी है। मार्च महीने तक तक काम पूरा कर लिया जाएगा। कोरवा व अन्य विशेष पिछड़ी जनजाति के लोग आज भी ढोंढी का पानी पीने पर मजबूर है। सौर पैनल युक्त जल आपूर्ति टंकी लगने परिवारों को स्वच्छ पानी मिलेगा।


Suraj Tandekar

Chief Editor

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