जेनेरिक दवाओं से निजी चिकित्सकों ने बनाई दूरी, खपत कम
प्रदेश का कामकाज संभालते ही विष्णुदेव साय ने भले ही जेनेरिक दवाओं को महत्व दिए जाने की बात कही हो पर इस पर निजी अस्पतालों में चिकित्सक अभी भी अमल नहीं कर रहे।
कोरबा प्रदेश का कामकाज संभालते ही विष्णुदेव साय ने भले ही जेनेरिक दवाओं को महत्व दिए जाने की बात कही हो पर इस पर निजी अस्पतालों में चिकित्सक अभी भी अमल नहीं कर रहे। सरकारी अस्पताल के डाक्टर जनौषधि से जुड़ी दवाएं लिखते हैं लेकिन निजी अस्पतालों ने इससे पूरी तरह से दूरी बना ली है। शहर के सभी बड़े अस्पतालों में उनके खुद का मेडिकल दुकान संचालित है। मरीजों के स्वजनों को ब्रांडेड मंहगी दवाएं खरीदने के लिए बाध्य किया जाता है।
प्रधानमंत्री जनौषधि केंद्र बिकने वाली सस्ती दवाओं के प्रति लोगाें की विश्वसनीयता बढ़ने लगी है। जिले शहर सहित उपनगरीय क्षेत्रों में तीन दुकानों का संचालन हो रहा है। इन दुकानें में बीपी, शुगर, कोलेस्ट्राल जैसे बीमारियों की दवाओं की सर्वाधिक मांग है। सामान्य दुकानों से बिकने वाली ब्रांडिंग कंपनी की दवाओं से 70 प्रतिशत कम दाम में उपलब्ध होने की वजह सस्ती दवा के प्रति लोगों की जागरूकता बढ़ती जा रही है। जन औषधि केंद्राें में मिलने वाली सस्ती दवाओं ने महंगी दवाओं से काफी हद तक राहत दी है। वर्ष 2021 में दो दुकानों की शुरूआत शहर के पुराना बस स्टैंड और घंटाघर में शुरू हुई। तब लोगों को यह नहीं लग रहा था कि इस पर आम लोगों की निर्भरता यहां बिकने वाली दवाओं में बढ़ जाएगी। दुकान संचालक रिजवान खान का कहना है कि केंद्र सरकार खास प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की ब्रांडिंग होने की वजह से लोग अब दवाओं को पूर्ण विश्वसनीयता के साथ खरीद रहे है। दवाएं सस्ती होने के कारण ही नहीं बल्कि स्वास्थ्य के लिए कारगर से अधिक बिक रही है।
सर्दी, खांसी, बुखार जैसे आम बीमारियों के अलावा हृदय रोग, शुगर मरीज, प्रसूति आदि के इलाज के जिस फार्मूले पर ब्रांडिंग कंपनिया 60 से 70 प्रतिशत अधिक दामों में बेच रही वहीं दवाएं हमारे जनौषधि केंद्र में 30 से 40 प्रतिशत दामों में उपलब्ध है। पैरासिटामोल की जो दवाएं आम बाजार में 30 से 40 रूपये में बिकती है वहीं दवा जनऔषधि में 10 रूपये में उपलब्ध है। ब्रांडेड कंपनियाें की दवाओं की तरह सस्ती दवाएं भी कारगर हैं। रिजवान का कहना है कि दवा सस्ती होने के कारण एक दो दिन की नहीं बल्कि माह भर के लिए एकमुश्त ले जाते हैं। केंद्र में सर्जिकल और मेडिसीन मिलाकर डेढ़ हजार से भी अधिक उत्पाद बिक रहे हैं। शुरूआती दौर में उत्पादाें की संख्या हजार से भी कम थी। दवाओं की कीमत अधिक होने की वजह से लोग पहले सुरक्षात्मक दवाओं को घर में पहले से नहीं रखते थे। जनौषधि केंद्रों जलने कटने, चोट लगने, अस्थि जोड़ दर्द, सर्दी, बुखार की दवाएं सस्ते दामों में उपलब्ध होने की वजह पहले खरीद कर रखने लगे हैं।
मुख्यमंत्री जेनेरिक दवा हो सकती है समायोजित
जिले तीन प्रधान मंत्री जनौषधि केंद्र के अलावा आठ मुख्यमंत्री धन्वतंरी औषधि केंद्र कभी संचालन हो रहा है। धन्वंतरि औषधि की दुकानों को कांग्रेस की सरकार ने शुरू की थी। सत्ता परिवर्तन के बाद अनुमान लगाया जा रहा है सभी दुकानाें कोे अब प्रधानमंत्री जनौषधि केंद्रों में समाहित किया जाएगा। ऐसा किए जाने पर मरीजों को अधिक उत्पादों से के दवाएं मिलेगी।
इनका कहना
आसान उपलब्धता से मिल रही राहत
प्रधानमंत्री जेनेरिक दवाएं लोगों के बहुत कारगर हैं। ब्रांडेड कंपनियों की दवाओं की तुलना में सस्ते दाम में लोगों को आसानी से मिल रहा है। दाम अधिक होने की वजह से गरीब परिवार के लोग दवा खरीदने असमर्थ थे ऐसे में जनौषधि सहारा बना है।
रजनी साहू, ढोंढीपारा
उत्पादों को बढ़ाना होगा
सर्जिकल से संबंधित कई दवाएं जनौषधि में नहीं मिलती। इससे मरीज अथवा उनके स्वजनों को बाध्य होकर ऊंचे दाम की दवाओं को खरीदना पड़ता है। सरकार का चाहिए कि वह सभी तरह के दवाओं का उत्पादन करे ताकि लोगाें को भटकना न पड़े।
नवीन देवांगन, पुरानी बस्ती कोरबा
ग्रामीण क्षेत्र के लोगों से अब भी दूर
प्रचार प्रसार के अभाव में ग्रामीण क्षेत्र के लोग अब भी प्रधानमंत्री जनौषधि सुविधाओं से वंचित हैं। अच्छी बात यह है कि केंद्र सरकार ने भारत संकल्प यात्रा के तहत जनौषधि दवाओं का स्टाल लगाना अनिवार्य किया है। इससे लोगों तक सस्ती दवा के बारे जानकारी मिलेगी।
सोनसाय साहू, कोहड़िया
प्रधानमंत्री जेनेरिक दवा का आम लोगो को लाभ मिल रहा है। निजी अस्पताल जनौषधि में उपलब्ध दवाएं मरीजों के उपयोग के लिए लिखें इस संबंध में शासनक की कोई गाइडलान नहीं आई है। मुख्यमंत्री धन्वंतरि जनौषधि की दुकानें अभी भी संचालित है। प्रधानमंत्री जनौषधि में समाहित किए जाने बारे में विभाग को अभी किसी प्रकार की सूचना नहीं मिली है।
डा. एसएन केसरी, जिला मुख्य चिकित्सा अधिकारी



