पहले ही झेल रहे प्रदूषण की मार, कैसे निपटेगा नए संयंत्र का राखड़
शिकायत के बाद भी प्रबंधन समस्या निराकरण के प्रति गंभीर नही है। इस दौरान 33 लोगों ने मौखिक तथा 18 लोगों ने लिखित में अपनी सुझाव व आपत्ति दर्ज कराई।
कोरबा । हसदेव ताप विद्युत संयंत्र कोरबा पश्चिम (एचटीपीपी) परिसर में प्रस्तावित 1320 मेगावाट सुपर क्रिटिकल ताप विद्युत संयंत्र के लिए पर्यावरणीय जनसुनवाई आयोजित की गई। इस दौरान प्रभावित गांव के निवासियों ने राखड़ की समस्या को लेकर जमकर नाराजगी जताई। उन्होंने कहा कि कंपनी के समक्ष राख रखने की व्यवस्था नहीं है, लगभग सभी राखड़ बांध भर चुके हैं और खुले मैदान में राख फेंकी जा रही। जो उड़ कर घर में घुस रही है। प्रदूषण की वजह से जीना मुश्किल हो गया है। शिकायत के बाद भी प्रबंधन समस्या निराकरण के प्रति गंभीर नही है। इस दौरान 33 लोगों ने मौखिक तथा 18 लोगों ने लिखित में अपनी सुझाव व आपत्ति दर्ज कराई।
एचटीपीपी स्थित लाल मैदान में आयोजित पर्यावरणीय जनसुनवाई में अपर कलेक्टर प्रदीप साहू, अनुविभागीय अधिकारी ऋचा सिंह, क्षेत्रीय पर्यावरण संरक्षण मंडल अधिकारी शैलेष पिस्दा मंचस्थ रहे। सुबह 11 बजे शुरू सुनवाई में धीरे- धीरे पहुंच रहे ग्रामीणों ने अपनी बात रखना शुरू किया। नवागांव, झाबू, स्याहीमुडी समेत अन्य ग्राम से पहुंचे ग्रामीणों ने अपनी आपत्ति दर्ज कराते हुए राख से होने वाले प्रदूषण से अवगत कराया। उन्होंने कहा कि राखड़ बांध खाली करने के लिए खुले मैदान में फेंकी गई राख वर्षाकाल में पानी के साथ बह कर खेत में पहुंच जाती है और इससे फसल को नुकसान पहुंच रहा है। प्रबंधन को अवगत कराने के बाद भी समस्या निराकरण के प्रति गंभीरता नहीं दिखाई जाती है। न तोे क्षतिपूर्ति प्रदान की जाती है और नहीं राख हटाया जाता है। नया प्लांट स्थापित होने से प्रबंधन राख कहां रखेगा, इस बारे में स्पष्ट रूप से कुछ बताने को तैयार नही है। लोतलोता राखड़ बांध भर चुका है, वहीं डिंडोलभाठा राखड़ बांध भी अब भराव की ओर पहुंच चुका है। शत- प्रतिशत राख यूटिलाइजेशन की बात कही जाती है, पर आश्चर्य की बात है कि राख खपत कैसे करेंगे। इस बारे में कोई जानकारी देने तैयार नही है। इस दौरान अधिकांश लोगों ने संयंत्र स्थापना का खुल कर विरोध जताया। इस दौरान परियोजना प्रस्तावक की ओर से मुख्य अभियंता (परियोजना) एचएन कोसरिया ने प्रस्तावित परियोजना के पर्यावरण से संबंधित विषयों पर विस्तृत जानकारी प्रदान की। जनसुनवाई के बाद संपूर्ण रिपोर्ट तैयार कर पर्यावरण संरक्षण मंडल रायपुर रिपोर्ट भेजी जाएगी। उसके बाद वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय रिपोर्ट जाएगी। दोनों स्थानों से पर्यावरणीय अनुमति मिलने के बाद ही संयंत्र निर्माण की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी। इस कार्य में लगभग तीन माह का वक्त लगने की संभावना जताई जा रही है।
नौकरी, शिक्षा व मेडिकल सुविधा का मुद्दा भी उठा
सुनवाई के दौरान एचटीपीपी के 840 मेगावाट से प्रभावित लोग भी स्थल पर पहुंचे। उन्होंने कहा कि संयंत्र के लिए जमीन दी, पर दुर्भाग्य की बात है कि लगभग 40 वर्ष बाद भी उन्हें नौकरी नहीं दी गई। बार- बार पत्र लिखने पर टालमटोल की नीति अख्तियार किया जा रहा है और मध्य प्रदेश विद्युत मंडल अवधि में जमीन अधिग्रहण होने की बात कही जा रही है। इसी तरह शिक्षा की उचित व्यवस्था नहीं किए जाने का मुद्दा प्रमुखता उठाया। साथ ही संयंत्र से प्रभावितों ने मेडिकल सुविधा उपलब्ध नहीं कराने की बात कही। उन्होंने कहा कि कंपनी द्वारा अभी तक किसी भी प्रभावित गांव में चिकित्सा सुविधा के लिए शिविर तक नहीं लगाया गया है। इससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि प्रबंधन, प्रभावितों के प्रति कितना गंभीर है।
खाली पड़ी रही कुर्सी
सभास्थल पर प्रबंधन द्वारा बैठने की व्यवस्था की गई थी, पर दिन भर 80 प्रतिशत कुर्सी खाली पड़ी। नाममात्र की महिलाएं ही स्थल पर पहुंची, जबकि पुरूषों में उपस्थित थी, बावजूद कुर्सियां खाली पड़ी। जैसे- जैसे समय बीतता गया और लोग उठ कर जाने लगे। इससे महिला व पुरूष दोनों तरफ दोपहर दो बजे तक उपस्थिति नगण्य हो गई। स्थिति यह थी कि सुनवाई के दौरान 10 से 15 मिनट के अंतराल में लोग अपना विचार व्यक्त करने जा रहे थे।
एमडी की अनुपस्थिति बनी चर्चा का विषय
विद्युत कंपनी की यह सबसे महत्वपूर्ण परियोजना है। पर्यावरणीय अनुमति के लिए जनसुनवाई काफी अहम हो गया था और प्रबंधन को हर हाल में पक्ष में करते हुए सफल बनाना था। बावजूद इस दौरान कंपनी के प्रबंध निदेशक अनुपस्थिति उपस्थिति लोगों के मध्य चर्चा का विषय बनी रही। हालांकि रायपुर से मुख्य अभियंता प्रोजेक्ट एचएन कोसरिया व सिविल से नाग पहुंचे थे, वहीं स्थानीय स्तर पर मुख्य अभियंता संजय शर्मा व प्रोजेक्ट मैनेजर भुवनेश्वर पाटले समेत अन्य अधिकारी उपस्थित रहे।
प्रभावित ग्रामीणों को लाने की व्यवस्था नहीं
नए संयंत्र से ग्राम पंचायत नवागांवकला, पंडरीपानी, डिंडोलभाठा, कसईपाली, सोनगुड़ा, बिरदा, अरदा, धनरास, अजगरबहार, चुइयां, सोनपुरी, तेलसरा, खोड्डल, पाली, धनगांव समेत अन्य गांव प्रभावित होंगे। इन गांव में प्रबंधन ने सूचना अवश्य भेजी, पर ग्रामीणों को लाने के लिए कोई व्यवस्था नहीं की। कार्यक्रम स्थल से गांव दूर होने की वजह से अधिकांश ग्रामीण अपने सुझाव व आपत्ति दर्ज कराने स्थल नहीं पहुंच सके। यही वजह है कि आपत्ति दर्ज कराने वालों में ग्रामीणों की संख्या कम रही।
संयंत्र पर एक नजर
सुपर क्रिटिकल ताप विद्युत परियोजना
क्षमता- 660-660 मेगावाट की दो इकाई
लागत- लगभग 13 हजार करोड़
कोयला आपूर्ति- कुसमुंडा खदान से (6.50 एमटी)
उत्पादन शुरू- पहली इकाई एक मार्च 2029 व दूसरी से दो मार्च 2030 से
पानी- सालाना 28 एमसीएम
स्थान- वर्तमान संयंत्र के पास खाली पड़ी भूमि
कुल जमीन- 71 हेक्टेयर
बढ़ी हुई मांग के दौर में भी सरप्लस बिजली की स्थिति बनी रहेगी
पूर्व राजस्व मंत्री जयसिंह अग्रवाल ने कहा है कि कांग्रेस कार्यकाल में इस संयंत्र की नींव रखी गई। इससे राज्य में बिजली की बढ़ी हुई मांग के दौर में भी सरप्लस बिजली की स्थिति बनी रहेगी। साथ ही स्थानीय लोगों को सीधे तौर पर नौकरी मिलेगी, साथ ही अप्रत्यक्ष रूप से रोजगार के अवसर मिलेंगे। जनसुनवाई की इस प्रक्रिया के साथ ही संयंत्र स्थापना की ओर एक कदम ओर अग्रसर हुआ है। उन्होंने भाजपा सरकार से अपेक्षा करते हुए कहा है कि उम्मीद के अनुरूप जल्द ही प्रोजेक्ट रिपोर्ट के आधार पर इसका निर्माण कार्य शुरू कराई जाएगी। अग्रवाल ने यह भी कहा कि हमारा यह सपना था कि औद्योगिक नगरी में नया विद्युत संयंत्र लगे और वह अब साकार होने जा रहा। राखड़ निपटान का प्रबंधन उचित निराकरण करें, ताकि आम लोगों को परेशानी न हो।



