Korba

बकरी और गाय पालकों के लिए अब बनेगा किसान क्रेडिट कार्ड

योजना का उद्देश्य डेयरी विकास में प्रगति लाने के साथ विशेष पिछड़ी जन-जाति के लोगाें को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर करना है।

कोरबा। पशुधन विकास विभाग से अब पशुपालकाें के लिए भी किसान क्रेडिट कार्ड तैयार किया जाएगा। अब तक यह सुविधा कृषि विभाग के तहत अनाज, दलहन तिलहन उत्पादन करने वाले भू-स्वामियों का ही मिल रही थी। मवेशी पालकों को चारा उत्पादन के लिए किसान क्रेडिट कार्ड से प्रति मवेशी 35,000 रूपये की ऋण की सुविध मिलेगी। योजना का उद्देश्य डेयरी विकास में प्रगति लाने के साथ विशेष पिछड़ी जन-जाति के लोगाें को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर करना है।

पशु पालन और डेयरी उद्योग की राह आसान करने के लिए अब तक सरकारी योजना में ऋण लेने वालों को सब्सिडी प्रदान की जा रही थी। इस योजना से विशेष पिछड़ी जनजाति के लोगाें को लाभ नहीं मिल पा रहा था। वजह यह है कि कोरवा, बिरहोर, पंडों परिवार के लोग मवेशी के बजाए बकरी व मुर्गी पालन करते हैंं। किसान क्रेडिट कार्ड की सुविधा अब बकरी पालन करने वाले किसानों को मिलेगी। पोषक चारा होने से पशुधन संख्या में बढ़ोतरी होगी। इससे किसानों में आत्मनिर्भरता आएगी। साथ डेयरी उद्योग के प्रति लोगाें की रूझान बढ़ेगी।

बताना होगा कि इस वर्ष डेयरी लिए पशुधन विकास विभाग को 60 इकाई का लक्ष्य मिला है। इनमें 50 आवेदकों के आवेदन को स्वीकृति मिल चुकी है। योजना के तहत 1.40 लाख की इकाई स्थापित करने के लिए सरकार ने जाति वर्गवार सब्सिडी तय की है। निर्धारित इकाई लागत में अनुसूचित जाति व अनुसूचित जनजाति के लिए 66 प्रतिशत छूट का प्रविधान है। सामान्य वर्ग के लिए 50 प्रतिशत का छूट सुनिश्चित किया गया है। विशेष पिछड़ी जनजाति के लोगाें को किसान क्रेडिट कार्ड से जोड़ने की पहल की जा रही है। पशुधन विकास विभाग ने इसके लिए कोरवा व बिरहोर परिवार के बकरी व मुर्गी पालन करने वाले आठ सदस्यों को चिन्हांकित किया है, जिन्हे योजना लाभ के लिए प्रशिक्षित भी किया जाएगा।

वनांचल क्षेत्रों में अधिक संभावना

जिले के वन क्षेत्रों में बड़े डेयरी उद्योग की अपार संभावना है। ग्रामीण व शहरी क्षेत्राें के चारागाहों में बेजाकब्जा होने पशुपालन घट गई है। इसका असर ग्रामीण क्षेत्र के लघु डेयरी उद्योग पर पड़ा हैं। बहरहाल जिले में अब संचालित हो रही डेयरी उद्योग में लगभग 40 इकाई वनांचल क्षेत्र के नदी तट में संचालित हो रहे हैं। यहां हरा चारा उपलब्ध होने लोगाें के लिए मवेशी पालन आसान है। सिंचाई सुविधा होने से विशेष पिछड़ी जनजाति के लोग नेपियर के अलावा मुर्गी के दाने के लिए मक्का का उत्पादन कर सकते हैं।

नेपियर घास व्यवसाय के लिए किया जा रहा प्रेरित

जिन लोगाें ने डेयरी उद्योग की शुरूआत की है उन्हे विभाग की ओर से नेपियर घास लगाने के लिए प्रेरित किया जा रहा है। जिले में 38 डेयरी उद्योग से जुड़े किसान के नेपियर घास की खेती कर रहे हैं। इससे उन्हे दोहरा लाभ ले रहे हैं। सामान्य किसानों के अलावा गोठानों में भी यह व्यवसायिक पैमाने पर उगाया जा रहा है। बकरी पालन तक सीमित रहने वाले विशेष पिछड़ी जन जाति के लोगों को ऋण की सुविधा उपलब्ध होने से मवेशी पालन से भी जुड़ सकेंगे।

123 डेयरी उद्योग का हो रहा संचालन

जिले में 123 डेयरी उद्योग का संचालन हो रहा है जो आवश्यकता के अनुसार पर्याप्त नहीं है। बड़े डेयरी उद्योगों की कमी होने की वजह से अभी भी जिले के मिष्ठान्न प्रतिष्ठान संचालक दीगर जिले के दुग्ध उत्पादन पर निर्भर हैं। जिले में अभी भी अंबिकापुर और जांजगीर के जिले के डेयरी की दूध खपत होती है। बहरहाल डेयरी उद्योग से लोगाें को स्वरोजगार से जुड़ने का अवसर मिल रहा है। छेना, खोआ, मिठाई पनीर जैसे उत्पाद से लोगों को अधिक लाभ मिल रहा है।

मवेशी पालकों के लिए किसान क्रेडिट कार्ड बनाया जा रहा है। इस योजना के तहत चारा के लिए किसानों को ऋ ण की सुविधा मिलेगी। विशेष पिछड़ी जनजाति के लोगों को भी योजना लाभ दिलाने के लिए चिन्हांकित किया गया है। इस योजना से डेयरी उद्योग से जुड़े लोगों को भी सुविधा मिलेगी। राज्य सरकार से इस बार जिले में 60 डेयरी उद्योग लगाने का लक्ष्य मिला था। जिसके विरूद्ध 50 लोगों को योजना का लाभ दिया गया है।

एसपी सिंह, उप संचालक, पशुधन विकास विभाग


Suraj Tandekar

Chief Editor

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