Chhattisgarh

लिव इन रिलेशन भारतीय संस्कृति में कलंक बनी हुई है… बच्चे की कस्टडी मांग रहे मेल पार्टनर को छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट से झटका

Chhattisgarh Live-In Relation News: छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने बच्चे की कस्टडी को लेकर लिव इन पार्टनर की याचिका को खारिज कर दी है। साथ ही सख्त टिप्पणी की है। कोर्ट ने कहा कि लिव इन रिलेशन आज भी भारतीय संस्कृति में कलंक बनी हुई है। यह भारतीय पारंपरिक मान्यताओं में मान्य नहीं है।

रायपुर: छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने एक व्यक्ति की याचिका को खारिज कर दी है, जो बच्चे की कस्टडी को लेकर थी। लिव इन रिलेशन में रहने वाले कपल ने बच्चे को जन्म दिया था। बाद में महिला अलग हो गई थी। इसके बाद बच्चे के बॉयलॉजिकल पिता ने कोर्ट में कस्टडी के लिए याचिका लगाई थी। सुनवाई के दौरान कोर्ट ने व्यक्तिगत कानूनों और अंतरधार्मिक विवाहों की जटिलताओं पर जोर दिया है।

भारतीय संस्कृति के लिए कलंक
जस्टिस गौतम भादुड़ी और संजय एस अग्रवाल की खंडपीठ ने कहा कि लिव-इन रिलेशनशिप की अवधारणा… ‘भारतीय संस्कृति में कलंक बनी हुई है, क्योंकि यह पारंपरिक भारतीय मान्यताओं के खिलाफ है।’ हाईकोर्ट ने कहा कि यह पश्चिम सभ्यता है जो भारतीय सिद्धांतों की सामान्य अपेक्षाओं के विपरीत है।’ उन्होंने कहा कि पर्सनल लॉ के नियमों को किसी भी अदालत में तब तक लागू नहीं किया जा सकता जब तक कि उन्हें प्रथागत प्रथाओं के रूप में प्रस्तुत और मान्य नहीं किया जाता।

दंतेवाड़ा के व्यक्ति ने लगाई थी याचिका

दरअसल, दंतेवाड़ा निवासी याचिकाकर्ता अब्दुल हमीद सिद्दीकी (43) ने एक अलग धर्म की महिला (36) के साथ लिव-इन रिलेशनशिप से पैदा हुए बच्चे की कस्टडी मांगी थी। दंतेवाड़ा की यह फैमिली कोर्ट ने दिसंबर 2023 में उनकी याचिका खारिज कर दी थी, जिसके बाद उन्होंने हाईकोर्ट का रुख किया।

शादी से पहले तीन साल तक रहे साथ

सिद्दीकी ने दावा किया कि 2021 में ‘शादी’ करने से पहले वे तीन साल तक साथ रहे। उन्होंने दावा किया कि उन्होंने हिंदू कानून का पालन करने वाली महिला के साथ ‘मुस्लिम रीति-रिवाजों के अनुसार’ अंतरधार्मिक विवाह किया था। उन्होंने तर्क दिया कि मुस्लिम कानून के अनुसार, उन्हें ‘कई शादियां करने का अधिकार है, जिससे दूसरी शादी वैध हो जाती है’। उन्होंने यह भी दावा किया कि वे बच्चे की देखभाल करने में सक्षम हैं।

माता-पिता के साथ रहना चाहती है महिला

महिला अपने माता-पिता के साथ आई और उसने कहा कि वह अपने माता-पिता के साथ रहना चाहती है। साथ ही उसने उसके कस्टडी के दावे का विरोध किया।

पहले से शादीशुदा है याचिकाकर्ता

अदालत ने याचिकाकर्ता के बयानों में विसंगतियां पाईं, विशेष विवाह अधिनियम के तहत विवाह की वैधता के बारे में, क्योंकि वह पहले से ही शादीशुदा था। अपनी पत्नी के साथ रहता था और उसके तीन बच्चे थे। महिला के वकील ने तर्क दिया कि याचिका में विवाह की वैधता साबित करने के लिए सबूतों का अभाव है।


Suraj Tandekar

Chief Editor

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