Korba

हडि्डयां नहीं होंगी टेढ़ी-मेढ़ी, 17 गांव में पहुंचेगा शुद्ध पानी

बांगों बांध से पानी देने की इस योजना में 245 गांव को शामिल किया जाना है। अभी तक काम शुरू नहीं किया गया है। जल जीवन मिशन की शुरूआत वर्ष 2019 से हुई है।

पोड़ी उपरोड़ा विकासखंड के फ्लोराइड प्रभावित 17 गांव के लिए शुद्ध पेय जल की प्रतीक्षा अब समाप्त हो गई है। प्रभावित गांवों तक पानी पहुंचाने के लिए समूह जल प्रदाय की टंकी व फिल्टर प्लांट कांपानवारा में बनकर तैयार हो चुका है। गर्मी में सभी गांव तक पानी पहुंचाने के लिए पीएचई ने जल प्रदाय परीक्षण शुरू कर दिया है। जिला खनिज न्यास के 32.87 करोड़ की लागत से तैयार इस योजना से प्रभावित गांवों की 19 हजार आबादी को शुद्ध पेयजल मिलेगा। अधिक फ्लोराइडयुक्त पानी पीने से टेढ़ी-मेढ़ी हो रही हड्डियों की बीमारी से जूझ रहे ग्रामीणों को मुक्ति मिलेगी।

पानी की समस्या से जूझ रहे ग्रामीणों तक शुद्ध पेयजल प्रदान करने के लिए बांगो बांध से जिले का पहला समूह जल प्रदाय योजना शुरू हो रही है। पोड़ी-उपरोड़ा ब्लाक के 23 गांव के 38 हजार से भी अधिक लोग फ्लोराइड प्रभावित पानी पी रहे हैं। इसके लिए जिला प्रशासन की ओर से छह साल पहले पहल की गई थी। लोगों को शुद्ध पेयजल आपूर्ति के लिए जिला खनिज न्यास मद से बांगो बांध का पानी गांवों तक पहुंचाने का निर्णय लिया गया। मार्च 2017 में चोटिया समूह जल प्रदाय नाम से योजना को स्वीकृति दी गई। प्राक्कलन के अनुसार दो एमएलडी क्षमता वाली जल शुद्धिकरण संयंत्र के अलावा 110 किलोलीटर के वाटर टंकी के लिए विस्तार पाइप स्वीकृत किया गया। निर्माण एजेंसी के अनुबंध के अनुसार काम 2021 तक पूरा कर लेना था लेकिन कोविड और लाकडाउन के कारण काम बंद रहा। योजना को भाजपा के कार्यकाल में स्वीकृति मिली थी। अब फिर भाजपा सत्ता में है, ऐसे में कार्य को अमलीजामा पहनाने में विभाग की सक्रियता बढ़ गई है।

लंबे समय बाद काम पूरा होने से अधिकारियों ने राहत की सांस ली है। जल प्रदाय के लिए प्रत्येक गांव में टंकी का निर्माण किया गया है। 25 किलोमीटर के दायरे में पाइप लाइन बिछाई गई है। कांपानवापारा में निर्मित फिल्टर प्लांट व टंकी से सभी गांव के टंकी में पानी भेजा जाएगा। पोड़ी-उपरोड़ा ब्लाक जिले का सबसे बड़ा ब्लाक है। सभी फ्लोराइड प्रभावित गांवाें तक शुद्ध पेयजल पहुंचाने के लिए जलजीवन मिशन तहत भी समूह जल प्रदाय योजना प्रस्तावित है। बांगों बांध से पानी देने की इस योजना में 245 गांव को शामिल किया जाना है। अभी तक काम शुरू नहीं किया गया है। जल जीवन मिशन की शुरूआत वर्ष 2019 से हुई है। 1,305 करोड़ की लागत से दिसंबर 2024 तक 703 गांव के घर-घर पानी पहुंचाना है।

प्रभावित क्षेत्र में दो पीपीएम तक फ्लोराइड की मात्रा

विश्व स्वास्थ्य संगठन और भारतीय मानक ब्यूरो के अनुसार एक लीटर पानी में फ्लोराइड की मात्रा 1.5 पार्ट पर मिलियन (पीपीएम) से अधिक नहीं होनी चाहिए। समूह जल योजना के नोडल व कार्यपालन अभियंता वीके उरमालिया ने बताया कि कोरबा के इन प्रभावित गांवाें में दो पीपीएम तक है। आठ से दस वर्षों तक फ्लोराइड युक्त पानी पीने से फ्लोरोसिस बीमारी का शिकार करीब 500 लोग हो गए हैं। पूरी आबादी के अनुपात में ढाई फीसदी लोग इस बीमारी से ग्रस्त हैं। 70 ऐसे प्रभावित लोग हैं जो शत-प्रतिशत इस रोग के चपेट में आ चुके हैं। इनकी मांसपेशी, हड्डियां व घुटने कमजोर हो चुकी हैं। कभी भी हड्डियों के टूटने की आशंका रहती है। कई लोगों की कमर झुक गए हैं।

फ्लारोसिस रोग के लक्षण

अधिक फ्लराइडयुक्त पानी पीने का परिणाम लंबे समय बाद आता है। पेट में ऐंठन से इसकी शुरूआत होती है। दांत पीले पड़कर सड़ने लगते हैं। लंबे समय तक फ्लोराइडयुक्त पानी का सेवन करने वाला कंकाल फ्लोरोसिस का शिकार हो जाता है और हड्डियां टेढ़ी-मेढ़ी हो जाती है। दिनचर्या के काम भी करने लायक नहीं रहता।

इन गांव तक पहुंचेगा पानी

चोटिया, कांपानवापरा, परला, लमना, आमाटिकरा, हड़मोर, मातिनखार, बनिया, लालपुर, घुंचापुर, भुजंगकछार, सखोदा, पोड़ी खुर्द, लाद, रोदे, पुूलसर एवं कोरबी।

कई पीढ़ियों से झेल रहे अभिशाप

क्षेत्र के लोग कई पीढ़ी से फ्लोरोसि बीमारी का दंश झेल रहे हैं। घुंचापुर, आमाटिकरा, परला आदि ऐसे गांव हैं जहां प्रत्येक सदस्य अस्थि रोग से प्रभावित हैं। गांव में संचालित स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों के दांत के पीलेपन और अस्थि बाधित होने से बीमारी का सहज अनुमान लगाया जा सकता है। बीमारी के कारण युवावस्था के लोग खेतों, खलिहानों में क्षमता के अनुरूप काम नहीं कर पाते। कार्य अक्षमता के कारण अधिकांश परिवार आर्थिक तंगी की मार झेल रहे हैं।

0 फैक्ट फइल

17- योजना से जुड़ने वाले गांव

19,393- लाभान्वित जनसंख्या

32.18- करोड़ रूपये स्वीकृति लागत

2017- स्वीकृत वर्ष

भूमिगतजल में फ्लोराइड की एक निश्चित मात्रा होनी चाहिए। अगर मात्रा ज्यादा हो जाए तो फ्लोराइड बोन में जमा होने लगता है। इसका असर हड्डियों के साथ दांत व किडनी पर होता है। प्रभावित क्षेत्र के स्कूलों में शिविर लगाकर स्वास्थ्य परीक्षण किया जा रहा।

डा. एसएन केसरी, जिला मुख्य चिकित्सा अधिकारी

12 गांव की नल जल की टंकियां अभी भी सूखी

जल जीवन मिशन शुरू होने ने से पहले ग्राम पंचायतों में नल-जल योजना की शुरूआत की गई थी। जिले के 90 ग्राम पंचायतों में बोर की खुदाई कर जलापूर्ति के लिए टंकी तैयार की गई है। जल स्त्रोत सूखने और बोर खराब होन के कारण रजगामार, बरपाली, कोरकोमा सहित 12 ग्राम पंचायतों की टंकियां खंडहर में तब्दील हो रही हैं। ग्राम पंचायतों में पीएचई विभाग की ओर से प्रति वर्ष 15 हजार रूपये संधारण राशि दी जाती हैं। बंद हो चुके नल-जल को चार साल से भी अधिक समय बीत जाने के बाद सुधार नहीं हुआ है।


Suraj Tandekar

Chief Editor

Related Articles

Back to top button