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क्‍या नए कानून में है 10 लाख रुपये का जुर्माना या यह अफवाह? जानें भारतीय न्‍याय संह‍िता के सेक्‍शन 106 का पूरा सच

New Law Bharatiya Nyay Sanhita:इस कानून की जगह जो पहले भारतीय दंड संहिता के तहत कानून था 279 क्षेत्र के तहत जिसमें यदि किसी व्यक्ति की सड़क दुर्घटना में मृत्यु हो जाती थी और जो इस मृत्यु के लिए जिम्मेदार होता था उसे पर क्षेत्र 279 के साथ 304 ए भी जोड़ा जाता था और उसे क्षेत्र के तहत भी 2 साल से 7 साल तक की सजा का प्रावधान था साथ ही उसमें भी यह लिखा था कि जुर्माने के लिए दायी होगा.

सड़क दुर्घटना में लापरवाही से हुई मौत के मामले में वाहन चालक पर 10 लाख रुपए का जमाना लगाना महज अफवाह है. सरकार द्वारा इस मामले में जो नया सेक्शन जोड़ा गया है उसमें कहीं भी 10 लाख रुपए का उल्लेख ही नहीं है. हम आपको बताते हैं कि इस नए कानून में आधिकारिक तौर पर क्या कहा गया है और पिछले कानून से यह कितना भिन्न है?

सड़क दुर्घटनाओं के बढ़ते मामलों को देखते हुए सुप्रीम कोर्ट ने एक मामले की सुनवाई के दौरान यह ऑब्जरवेशन दिया था कि वाहन चालक जो लापरवाही से गाड़ी चलते हैं और सड़क पर दुर्घटना करके जिसमें किसी की मौत हो जाती है. वहां से भाग जाते हैं ऐसे लोगों के ऊपर सख्त कार्रवाई होनी चाहिए इसके बाद केंद्र सरकार ने निर्णय लिया कि नई भारतीय न्याय संहिता में इसके लिए एक नया सेक्शन जोड़ा जाए.

पहले आप यह जान लीजिए भारतीय न्याय संहिता के नए कानून में इस बाबत क्या लिखा गया है? इसके लिए नई संहिता में धारा 106 सब सेक्शन एक और सब सेक्शन दो बनाए गए हैं धारा 106 सबसेक्शन एक के तहत यदि कोई उतावलेपन से या अपेक्षा पूर्ण किसी ऐसे कार्य से किसी व्यक्ति की मृत्यु का कारण बनेगा जो अपराधिक मानव वध के दायरे में नहीं आता है वह दोनों में से किसी भांति के कारावास से जिसकी अवधि 5 वर्ष तक की हो सकेगी दंडित किया जाएगा और जुर्माने के लिए भी दायी होगा.

इस कानून की जगह जो पहले भारतीय दंड संहिता के तहत कानून था 279 क्षेत्र के तहत जिसमें यदि किसी व्यक्ति की सड़क दुर्घटना में मृत्यु हो जाती थी और जो इस मृत्यु के लिए जिम्मेदार होता था उसे पर क्षेत्र 279 के साथ 304 ए भी जोड़ा जाता था और उसे क्षेत्र के तहत भी 2 साल से 7 साल तक की सजा का प्रावधान था साथ ही उसमें भी यह लिखा था कि जुर्माने के लिए दायी होगा.

सरकार ने नई संहिता में धारा 106 में सब सेक्शन दो जोड़ा है यह नया सेक्शन है जो इसके पहले भारतीय दंड संहिता में नहीं था। इस सेक्शन में स्पष्ट तौर पर कहा गया है कि यदि कोई वाहन के उतावले पन या उपेक्षापूर्ण चालन से किसी की व्यक्ति की मृत्यु का कारण बनेगा जो आपराधिक मानव वध की श्रेणी में नहीं आता है और घटना के तत्काल बाद उसे पुलिस अधिकारी या मजिस्ट्रेट को रिपोर्ट किए बिना निकलकर भागेगा किसी भी भांति के ऐसे अवधि के कारावास से जो 10 वर्ष तक का हो सकेगा दंडित किया जाएगा और जमाने के लिए भी दायी होगा.

स्पष्ट तौर पर नए कानून में कहीं भी यह नहीं लिखा है कि जो ड्राइवर होगा उसे 10 लाख रुपये का जुर्माना भरना होगा और जो नया कानून बनाया गया है उसमें और पुराने कानून में महज एक अंतर है और वह अंतर है सजा का यदि कोई व्यक्ति किसी शख्स को वाहन दुर्घटना में जान से मार कर भाग जाएगा और बाद में पकड़ा जाएगा तो उसे उसका अपराध साबित होने पर 10 वर्ष तक की सजा हो सकेगी और जुर्माना भी लगाया जा सकता है इसमें कहीं भी यह नहीं कहा गया है कि जमाने की दंड राश‍ि 10 लाख रुपए होगी. इसमें यदि करने वाले का परिवार मोटर एक्सीडेंट क्लेम टर्मिनल के सामने जाता है तो वह अलग मामला होगा. सरकार का स्पष्ट तौर पर आधिकारिक तौर पर कहना है कि सुप्रीम कोर्ट के ऑब्जरवेशन के बाद बढ़ती सड़क दुर्घटनाओं के मद्देनजर इस कानून को और सख्त बनाया गया है..


Suraj Tandekar

Chief Editor

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