भू-विस्थापितों ने सीएमडी और कुसमुंडा महाप्रबंधक का फूंका पुतला
किसान सभा नेता ने कहा कि यदि 29-30 जनवरी की वार्ता में कोई नतीजा नहीं निकलता, तो आंदोलन और तेज किया जाएगा। पुतला दहन के दौरान गेवरा, दीपका, कुसमुंडा खदान से प्रभावित भू- विस्थापित उपस्थित रहे।
कोरबा। रोजगार की मांग को लेकर आंदोलन कर रहे भू- विस्थापितों ने एसईसीएल द्वारा दीपका में आयोजित सुरक्षा पखवाड़ा स्थल के बाहर सीएमडी और कुसमुंडा जीएम का पुतला फूंका। इस दौरान खनन आंदोलनकारी नेताओं के खिलाफ एसईसीएल प्रबंधन द्वारा एफआइआर दर्ज करने की निंदा की गई। पुतला दहन के दौरान जवानों से झूमा झटकी व बहस भी हुई।
किसान सभा और भू विस्थापित रोजगार एकता संघ की अगुवाई में भू-विस्थापितों द्वारा लगातार आंदोलन किया जा रहा है। एक दिन पहले ही कुसमुंडा कार्यालय में कब्ज का भू- विस्थापितों ने आंदोलन किया।तब प्रबंधन ने कुछ भू-विस्थापितों के लंबित रोजगार प्रकरणों की स्वीकृति देने के साथ ही अन्य प्रकरणों के लिए 29-30 जनवरी को उच्च स्तरीय वार्ता का आयोजन करने की लिखित सहमति दी। इस समझौते के प्रबंधन ने प्रशांत झा समेत तीन नेताओं के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई है। इससे क्षेत्र में तीखी प्रतिक्रिया हुई है और काफी संख्या में भू- विस्थापितों ने दीपका में आयोजित सुरक्षा पखवाड़ा स्थल पहुंच गए। भू- विस्थापित विरोधी और दमनकारी सीएमडी और कुसमुंडा जीएम के खिलाफ जमकर नारेबाजी की।
कार्यक्रम स्थल में जाने से और पुतला दहन रोकने के लिए काफी संख्या में पुलिस बल के साथ एसईसीएल के सुरक्षा गार्ड तैनात किए गए थे। बावजूद भू-विस्थापित पुतला फूंकने में कामयाब हो गए। हालांकि इस दौरान पुलिस और भू- विस्थापितों के बीच काफी खींचतान और नोकझोंक भी हुई। किसान सभा के जिला सचिव प्रशांत झा ने कहा कि कई उग्र आंदोलन के बाद कुसमुंडा प्रबंधन ने कई मांगों को माना है, लेकिन उस पर सकारात्मक कार्रवाई नहीं की। लिखित में उच्च स्तर पर बातचीत करने का आश्वासन देने के बाद प्रबंधन मुकर गया। इसलिए अब कुसमुंडा प्रबंधन की कोई साख आम जनता और ग्रामीणों की नजर में नहीं बची है। इस क्षेत्र में अशांति के लिए केवल कोयला प्रबंधन ही जिम्मेदार है।किसान सभा नेता ने कहा कि यदि 29-30 जनवरी की वार्ता में कोई नतीजा नहीं निकलता, तो आंदोलन और तेज किया जाएगा। पुतला दहन के दौरान गेवरा, दीपका, कुसमुंडा खदान से प्रभावित भू- विस्थापित उपस्थित रहे।
समझौता व एफआइआर एक साथ नहीं चलेगा : किसान सभा
छत्तीसगढ़ किसान सभा के जिला अध्यक्ष जवाहर सिंह कंवर और दीपक साहू ने एसईसीएल द्वारा एफआइआर दर्ज कराने को दमनात्मक रवैया बताते हुए एसईसीएल प्रबंधन की निंदा करते कहा कि आंदोलनकारियों के साथ समझौता और उनके खिलाफ एफआइआर एक साथ नहीं चल सकता। इससे पता चलता है कि कोल प्रबंधन आंदोलन के बढ़ते प्रभाव से घबराया हुआ है और हर बार की तरह ही समझौते का केवल दिखावा कर रहा है। उन्होंने कहा कि कोयला प्रबंधन आम जनता को दिग्भ्रमित न करें।



