Korba

फसल मुआवजा नहीं मिलने से दो घंटे किया जीएम कार्यालय का घेराव

माकपा जिला सचिव प्रशांत झा ने कहा कि वर्ष 2012 में एसईसीएल प्रबंधन ने खेतों के भूमि समतलीकरण करने का भी आश्वासन दिया था, लेकिन उसने इस पर भी आज तक अमल नहीं किया है।

कोरबा । एसईसीएल के बलगी- सुराकछार भूमिगत खदान के भू-धसान से प्रभावित किसानों के फसल मुआवजा नहीं मिलने पर महाप्रबंधक कार्यालय का घेराव किया। दो घंटे तक चले आंदोलन के बाद प्रबंधन ने मुआवजा देने का आश्वासन दिया, इसके बाद आंदोलन समाप्त किया गया। आंदोलन की वजह से कोई भी कर्मी कार्यालय समय पर नहीं जा सका और ना हीं अंदर गए लोग बाहर निकल सका।

साऊथ ईस्टर्न कोलफिल़्डस लिमिटेड (एसईसीएल) कोरबा क्षेत्र की भूमिगत खदान सुराकछार व बलगी के भू-धसान के कारण सुराकछार बस्ती के किसानों की भूमि वर्ष 2009 से कृषि कार्य करने योग्य नहीं रह गई है। इससे किसानों को हुए भारी नुकसान को देखते हुए वर्ष 2019-20 तक का फसल क्षतिपूर्ति व मुआवजा एसईसीएल प्रबंधन को देना पड़ा। इसके बाद वर्ष 2020-21 से वर्ष 2022-24 तक का चार वर्षों का मुआवजा नहीं दिया गया। इससे प्रभावित किसानों को आंदोलन का रास्ता अख्तियार करना पड़ा।

घेराव के दौरान प्रबंधन ने वार्ता के लिए माकपा और प्रभावित किसानों को बुलाया, पर बैठक में कोई ठोस निर्णय नहीं होने पर प्रदर्शन कारी बैठक से उठ कर बाहर निकल गए और मुख्य गेट से अंदर घुसकर महाप्रबंधक कार्यालय के अंदर धरना शुरू कर दिया। इस बीच सुरक्षा कर्मियों और पुलिस से काफी नोंकझोंक भी हुई। दो घंटे तक घेराव जारी रहने के बाद पुन: प्रबंधन ने प्रदर्शनकारियों को बैठक कर 10 दिनों में मुआवजा दिलाने का आश्वासन दिया, तब घेराव समाप्त हुआ। माकपा जिला सचिव प्रशांत झा ने कहा कि वर्ष 2012 में एसईसीएल प्रबंधन ने खेतों के भूमि समतलीकरण करने का भी आश्वासन दिया था, लेकिन उसने इस पर भी आज तक अमल नहीं किया है।

10 दिनों में मुआवजा भुगतान नहीं हुआ तो फिर अनिश्चितकालीन घेराव किया जाएगा। छत्तीसगढ़ किसान सभा के जिला अध्यक्ष जवाहर सिंह कंवर और सुमेंद्र सिंह कंवर ने कहा कि इस समस्या को लेकर कई बार आंदोलन किया गया है। लेकिन इस पर प्रबंधन ने आज तक गंभीरता से कोई कार्रवाई नहीं की है। इस दौरान एसईसीएल के अधिकारी, माकपा जिला सचिव प्रशांत झा, किसान सभा के जवाहर सिंह कंवर, ग्रामीण गणेश राम, सावित्री चौहान, दामोदर श्याम, गणेश, अमरजीत, सत्या ठाकुर, युराज सिंह, कन्हाई सिंह, अगहन बाई, दुल कुंवर, विमला, तुलसी, छत कुंवर, आनंद कुंवर, मिथिला के साथ बड़ी संख्या में प्रभावित किसान उपस्थित रहे।


Suraj Tandekar

Chief Editor

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