Korba

खनिज विभाग ने बंद कराया बाल्को का बैचिंग प्लांट और कोयला खदान

प्रदूषण पर नियंत्रण नहीं किए जाने समेत कुछ अन्य नियमों के उल्लंघन की बात सामने आई है।

कोरबा । खनिज विभाग की रायपुर से पहुंची टीम ने बाल्को में अचानक शुक्रवार की रात को छापेमारी अंदाज में जांच पड़ताल की कार्रवाई की और बैचिंग प्लांट को नियमों की अनदेखी का हवाला देते हुए बंद करा दिया। उधर एक अन्य टीम ने बाल्को के कोरबी- चोटिया स्थित कोयला खदान में परिवहन में लगी गाड़ियों की जांच पड़ताल की। इसके बाद यहां भी बाल्को भेजी जा रही कोयले की गाड़ियों को रोक दिया गया।

खनिज विभाग की 10 सदस्यीय उड़नदस्ता की टीम राजधानी रायपुर से यहां देर रात को पहुंची। रात से शुरू हुई जांच प़ड़ताल शनिवार को देर शाम तक चली। बाल्को संयंत्र परिसर के बाहर संचालित बैचिंग प्लांट का निरीक्षण किया गया। यहां बताना होगा कि इन दिनों 5.25 लाख टन क्षमता का स्मेल्टर प्लांट का निर्माण कार्य चल रहा है। करीब 13 हजार करोड़़ की लागत से बनने वाले इस संयंत्र के लिए बाल्को में ही बैचिंग प्लांट तैयार किया गया है। यहां सीमेंट, गिट्टी और रेत को भारी मशीन से मिक्स कर क्रांकीट तैयार किया जाता है और संयंत्र के निर्माण स्थल तक कैप्सूल वाहन के माध्यम से पहुंचाया जाता है। जांच पड़ताल के दौरान अधिकारियों ने नियमों का उल्लंघन किए जाने की बात कही। साथ ही बैचिंग प्लांट का काम बंद करा दिया।इसकी वजह से स्मेल्टर विस्तार परियोजना का निर्माण कार्य प्रभावित हो गया है। बाल्को के कैप्टिव पावर प्लांट के लिए कोयले की आपूर्ति चोटिया कोल ब्लाक से की जाती है। खनिज विभाग की टीम यहां पहुंच कर खदान से निकल रहे ट्रेलरों के चालकों से पूछताछ की और गेट पास समेत अन्य आवश्यक दस्तावेज खंगाले। यहां भी प्रदूषण पर नियंत्रण नहीं किए जाने समेत कुछ अन्य नियमों के उल्लंघन की बात सामने आई और यहां भी कोयला परिवहन का कार्य ठप करा दिया गया। इस दौरान स्थानीय पुलिस भी टीम के साथ रही। इस संबंध में जानकारी लेने खनिज विभाग के अधिकारियों से प्रयास किया गया, पर मोबाइल रिसीव नहीं किया।

कोयला पर केंद्रीत रही जांच पड़ताल, सीएचपी भी पहुंचे

देर शाम को खनिज विभाग की टीम बाल्को संयंत्र के प्रवेश कर गई और कोल हैंडलिंग प्लांट (सीएचपी) में कोयला के स्टाक की जांच पड़ताल की। स्टाक स्थल के अलावा कार्यालय में रखे दस्तावेजों का भी निरीक्षण किया गया। टीम की जांच पूरी तरह कोयला पर केंद्रीत रही। राजधानी के शीर्ष अधिकारियों के सीधी देखरेख में खनिज विभाग की टीम ने यह कार्रवाई की है।

कार्रवाई ने फिर याद दिला दी कांग्रेस कार्यकाल की

कांग्रेस के कार्यकाल में भी खनिज, पर्यावरण व परिवहन विभाग ने संयुक्त रूप से दीपका के चाकाबुड़ा प्लांट में संचालित कोल आर्यन बेनिफिकेशन पर छापामार कार्रवाई की थी और 210 मेगावाट क्षमता वाले विद्युत संयंत्र को बंद करा दिया था। करीब दो माह बाद कोलवाशरी व विद्युत संयंत्र को शुरू किए जाने की अनुमति दी गई। उस दौर में बाल्को में भी इसी तरह की कार्रवाई की गई थी। जानकारों का दावा है कि जांच पड़ताल के बाद खनिज विभाग को नोटिस जारी कर प्रबंधन को जबाव तलब करना था, संतोष जनक जवाब नहीं करने पर कार्रवाई किए जाने का प्रविधान है। इस तरह की कार्रवाई ने एक बार फिर कांग्रेस कार्यकाल की याद दिला दी है।


Suraj Tandekar

Chief Editor

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