आजादी के 78 साल बाद भी नहीं मिली रोशनी, कोरबा के इन गांवों में लोग आज भी अंधेरे में जी रहे…
Korba News: प्राकृतिक ससांधन से भरपूर कोरबा जिला विकास की मुख्यधारा से दूर है।
Korba News: प्राकृतिक ससांधन से भरपूर कोरबा जिला विकास की मुख्यधारा से दूर है। अलग-अलग विकासखंडों में आज भी कई ऐसे गांव है, जहां के लोगों ने कभी बिजली नहीं देखी है। विकास क्या होता है? यह नहीं जाना है। यह हाल तब है जब प्रदेश में सबसे ज्यादा बिजली का उत्पादन कोरबा में ही होता है।
इन लोगों तक सरकार की योजनाएं नहीं पहुंच सकी है। एक ऐसा ही गांव है कोरबा जिले के विकासखंड पोड़ी उपरोड़ा अंतर्गत स्थित गांव बुरनीझरिया। इस गांव में उरांव और पंडो जनजाति के लोग रहते हैं। गांव में रहने वाले लोगों ने बताया कि उनके गांव में अभी तक बिजली नहीं पहुंची है। इस अवधि में उनके गांव तक कोई सांसद भी नहीं पहुंचा है। गांव के लोगों ने बताया कि पिछली सरकार में क्षेत्र के विधायक पहली बार उनकी गांव आए थे।
गांव के लोगों ने विधायक से बिजली की मांग की थी। विधायक ने आश्वासन दिया था, कि सरकार आदिवासी क्षेत्रों के विकास को लेकर गंभीर है। जल्द ही उनके गांव में बिजली पहुंच जाएगी। इस बीच विधायक के पांच साल का कार्यकाल भी पूरा हो गया। मगर उनके गांव तक बिजली नहीं पहुंची। अब ग्रामीण खुद को ठगा हुआ महसूस कर रहे हैं। ऐसे समय जब लोकसभा का चुनाव संपन्न होने वाला है। ग्रामीणों का कहना है कि उनके गांव में आज तक कोई सांसद भी नहीं पहुंचा है। चाहे वह किसी भी पार्टी का हो।
विद्युतीकरण के नाम पर करोड़ों खर्च
आदिवासी बाहुल्य क्षेत्रों में बिजली पहुंचाने के लिए छत्तीसगढ़ के गठन के बाद से प्रदेश सरकार ने कई कोशिशें की। इसमें केंद्र सरकार से भी मदद मिली। लेकिन इसका लाभ पूरी तरह आदिवासी बाहुल्य इलाके में नहीं पहुंचा। आज भी कोरबा जिले में कई गांव है। जहां बिजली नहीं है। इसमें कोरबा जिला मुख्यालय से कोसों दूर स्थित ग्राम बगदरीडांड भी शामिल है। संरक्षित जनजाति पहाड़ी कोरवा के गांव सरडीह को भी बिजली और प्रदेश सरकार की योजनाओं का इंतजार है। ग्रामीण इस बात से नाराज हैं कि आजादी के 78 साल पूरे हो गए हैं। लेकिन उनका गांव बिजली से रोशन नहीं हुआ है।
कई ऐसे गांव हैं, जहां पर तकनीकी समस्या के कारण बिजली नहीं पहुंची है। इसमें फॉरेस्ट एरिया एक बड़ी बाधा है। इसके लिए कार्ययोजना तैयार की जा रही है। ताकि सभी गांव तक बिजली के तार पहुंचाकर गांव को रोशन किया जा सके।
– चंद्र प्रकाश गढ़ेवाल, डिविजनल इंजीनियर, कटघोरा क्षेत्र



