High Court News: बिलासपुर। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने जिला सहकारी बैंक बिलासपुर में नई नियुक्ति आदेश जारी करने पर रोक लगा दी है। जिला सहकारी केंद्रीय बैंक मर्यादित बिलासपुर द्वारा विभिन्न पदों के लिए विज्ञापन प्रकाशित किया गया था जिसमें मोहम्मद इमरान खान द्वारा समिति प्रबंधक के पद के लिए आवेदन प्रस्तुत किया था लिखित परीक्षा उत्तीर्ण करने के पश्चात इमरान खान को समिति प्रबंधक के पद पर नियुक्ति प्रदान की गई थी। इमरान खान द्वारा कार्यभार ग्रहण करने के बाद एक शिकायत कमिश्नर बिलासपुर संभाग के समक्ष हुई की जिला सहकारी बैंक में हुई नियुक्तियों में धांधली हुई है, जिसके कारण एक कमेटी बनाई गई। कमेटी ने यह पाया कि भर्ती नियम विरुद्ध है इसके बाद मोहम्मद इमरान खान को कारण बताओ सूचना पत्र जारी किया गया। स्पष्टीकरण प्रस्तुत करने के बाद जिला सहकारी केंद्रीय बैंक बिलासपुर द्वारा मोहम्मद इमरान खान की सेवाएं समाप्त कर दी गई।
सेवा समाप्ति आदेश से व्यथित होकर मोहम्मद इमरान खान ने संयुक्त पंजीयक सहकारी संस्थाएं रायपुर संभाग के समक्ष अपील प्रस्तुत की। मामले में संयुक्त पंजीयक रायपुर संभाग द्वारा सुनवाई करते हुए इमरान खान के सेवा समाप्ति आदेश को सही पाया। उपरोक्त आदेश से व्यथित होकर इमरान खान ने अपील छत्तीसगढ़ राज्य सहकारी अधिकरण बिलासपुर के समक्ष प्रस्तुत किया। सुनाई करते हुए छत्तीसगढ़ राज्य सहकारी अधिकरण ने भी इमरान खान के सेवा समाप्ति आदेश को सही पाया।
उपरोक्त आदेशों से परिवेदित होकर मोहम्मद इमरान खान ने हाई कोर्ट अधिवक्ता मतीन सिद्दीकी के माध्यम से प्रस्तुत किया गया, जिसकी सुनवाई करते हुए उच्च न्यायालय ने उत्तर वादी जिला सहकारी बैंक को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया था लेकिन उत्तर वादी जिला सहकारी बैंक द्वारा हाई कोर्ट द्वारा जारी नोटिस का जवाब न देकर बार-बार टाइम लिया जा रहा था। याचिकाकर्ता मोहम्मद इमरान खान के साथ अन्य साथियों को भी जिला सहकारी केंद्रीय बैंक बिलासपुर द्वारा सेवा से समाप्त किए जाने से परिवेदित होकर उच्च न्यायालय बिलासपुर में अधिवक्ता मतीन सिद्दीकी के माध्यम से याचिका प्रस्तुत किया गया था। सभी याचिकाओ की सुनवाई 12 फरवरी 2024 को न्यायमूर्ति अरविंद सिंह चंदेल के न्यायालय में हुई।
न्यायालय ने दोनों पक्षो को सुनने के बाद अंतरिम राहत देते हुए उत्तरवादी जिला सहकारी बैंक को निर्देशित किया है कि याचिकाकर्ताओं के द्वारा आवेदित पद पर अगली सुनवाई तक के लिए किसी अन्य को नियुक्ति आदेश जारी नहीं करने के निर्देश दिया गया है।

