Chhattisgarh

Korba Secl News: लेमरू हाथी अभयारण में प्रस्तावित सभी कोल ब्लाक होंगे निरस्त

छत्तीसगढ़ सरकार के गैर अधिसूचित करने के अनुरोध को केंद्र ने स्वीकारा, राज्य के 40 से अधिक नए ब्लाकों को कोयला खनन से बाहर रखने का निर्णय

कोरबा (नईदुनिया प्रतिनिधि)। कोयला मंत्रालय ने आखिरकार लेमरू एलिफेंट कारिडोर के अंतर्गत आने वाली कोयला खानों को गैर-अधिसूचित करने के छत्तीसगढ़ सरकार के अनुरोध को स्वीकार कर लिया है। कोल इंडिया लिमिटेड (सीआइएल) की कोयला खानों का भी विकास नहीं किया जा रहा है और कैप्टिव कोयला ब्लाकों को भी नीलामी के दायरे से बाहर रखा गया है। छत्तीसगढ़ सरकार के अनुरोध पर लेमरू एलिफेंट कारिडोर से आगे के क्षेत्रों को भी छूट देने पर विचार किया गया है।

छत्तीसगढ़ के लगभग 10 प्रतिशत आरक्षित क्षेत्र वाले 40 से अधिक नए कोयला ब्लाकों को कोयला खनन से बाहर रखने का निर्णय लिया गया है। कोयला मंत्रालय द्वारा पर्यावरण एवं वन मंत्रालय और राज्य सरकारों की अनुशंसाओं पर लगातार ध्यान केंद्रीत किया जा रहा है। पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय के सुझावों की अनदेखी करके किसी कोयला खदान की नीलामी तक नहीं की गई है। हसदेव-अरंड के घने कोयला क्षेत्र में आने वाली नौ कोयला खदानों को भी कोयला ब्लाकों की नीलामी के अगले दौर के लिए बाहर रखने का निर्णय कोयला मंत्रालय ने लिया है। इसी प्रकार, तीन लिग्नाइट खानों को आगे की नीलामी प्रक्रिया से बाहर रखने के लिए तमिलनाडु सरकार के अनुरोध को भी स्वीकार कर लिया गया है। कोयला मंत्रालय का निर्णय स्पष्ट रूप से वन क्षेत्रों को नीलामी के तहत रखने की उद्योग की मांग के बावजूद उनकी रक्षा करने का हैं। इस बार कोयला मंत्रालय का लक्ष्य कोयला उत्पादन में वृद्धि करने के साथ ही कोयले की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित करना है। मंत्रालय के प्रयासों के परिणामस्वरूप, पिछले पांच वर्षों के दौरान कोयले की कुल खपत में आयात का हिस्सा 26 प्रतिशत से घटकर 21 प्रतिशत हो गया। फिर भी, भारत भारी विदेशी मुद्रा खर्च करके सालाना 2000 लाख टन से अधिक कोयले का आयात कर रहा है। पिछले साल भारत ने कोयले के आयात बिल पर 3.85 लाख करोड़ रुपये से अधिक व्यय किए। भारत में कोयले का चौथा सबसे बड़ा भंडार है। इसलिए घरेलू उत्पादन को बढ़ाना युक्तिसंगत है जिससे कि आयात पर निर्भरता में कमी लाई जा सके।

भूमिगत खदानों पर दिया जा रहा जोर

मंत्रालय का कहना है कि भूमिगत कोयला खनन को बढ़ावा देने से पर्यावरण संरक्षण में सहायता मिल सकती है, इसकी जानकारी मंत्रालय को है। इसलिए भूमिगत कोयला खनन को बढ़ावा देने के लिए नीति तैयार की गई है। खनिकों की निरंतर तैनाती, हाई-वाल और लांग-वाल के माध्यम से प्रौद्योगिकी के उपयोग को बढ़ावा दिया गया है। पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय ने भूमिगत खानों के लिए प्रतिपूरक वनीकरण आवश्यकता से छूट की भी अनुमति दी गई है। निजी सेक्टर के माध्यम से खानों के प्रचालन में भूमिगत खनन में रुचि आकर्षित करने के लिए प्रोत्साहन प्रविधानों पर विचार किया जा रहा है।

51 लाख पौधे लगा किया लक्ष्य पार

कोयला मंत्रालय की अगुवाई में कोयला- लिग्नाइट सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों ने सतत और पर्यावरण के अनुकूल पहल पर काम किया जा रहा है। वित्त वर्ष 2018-19 से वित्त वर्ष 2023-24 तक लगभग 12,358 हेक्टेयर को कवर करते हुए 265 लाख से अधिक पौधे लगाकर हरित आवरण को बढ़ाया है। सिर्फ वित्त वर्ष 2023-24 के दौरान ही 2,734 हेक्टेयर में 51 लाख पौधे लगाकर अपने लक्ष्य को पार कर लिया। इसी तरह पिछले पांच वर्षों में पंद्रह इको-पार्क और खान पर्यटन स्थल भी विकसित किए हैं, जिनमें से सात को स्थानीय पर्यटन सर्किट में समेकित किया गया है और टिकाऊ पर्यटन तथा पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा देने के लिए कोयला खनन क्षेत्रों में 19 और को समेकित किए योजना है।


Suraj Tandekar

Chief Editor

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